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इतिहास के पन्ने

गुटनिरपेक्ष आंदोलन आखिर था क्या

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A vintage radio console and microphone sit on a wooden table, representing audio recording for Hindi news.
Photo: Broadcast Studio (53998133784) by Ethan Long (CC BY-SA 2.0), via Openverse

गुटनिरपेक्ष आंदोलन शीत युद्ध के दौर में उन देशों का एक समूह था, जिन्होंने अमेरिका और सोवियत संघ के नेतृत्व वाले दो बड़े शक्ति गुटों में से किसी का भी औपचारिक हिस्सा बनने से इनकार किया। इसका मकसद अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखना था, बिना किसी महाशक्ति के दबाव में आए।

इस आंदोलन में शामिल ज्यादातर देश हाल ही में औपनिवेशिक शासन से आज़ाद हुए थे, और वे आपसी सहयोग, संप्रभुता के सम्मान और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व जैसे साझा सिद्धांतों पर एकजुट हुए। इसमें भारत की भूमिका शुरुआती और प्रमुख संस्थापक देशों में गिनी जाती है।

यह आंदोलन किसी सैन्य या आर्थिक गुट की तरह संगठित नहीं था, बल्कि यह एक साझा राजनीतिक रुख था। शीत युद्ध खत्म होने के बाद इसकी प्रासंगिकता को लेकर बहस हुई, फिर भी यह विकासशील देशों की स्वतंत्र आवाज के प्रतीक के रूप में इतिहास में दर्ज है।

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