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ऑस्ट्रेलिया की संस्थाएँ

ऑस्ट्रेलिया में सीनेट और प्रतिनिधि सभा को समझना

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A vintage radio console and microphone sit on a wooden table, representing audio recording for Hindi news.
Photo: Broadcast Studio (53998133784) by Ethan Long (CC BY-SA 2.0), via Openverse

ऑस्ट्रेलिया की संसद दो सदनों में बंटी है: प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट। प्रतिनिधि सभा को “निचला सदन” कहा जाता है, जहाँ सीटें जनसंख्या के आधार पर बंटती हैं, और यहीं यह तय होता है कि कौन सी पार्टी सरकार बनाएगी, क्योंकि बहुमत वाली पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है।

सीनेट को “राज्यों का सदन” माना जाता है, क्योंकि यहाँ हर राज्य को जनसंख्या की परवाह किए बिना बराबर संख्या में सीनेटर मिलते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि छोटे राज्यों की आवाज़ भी संसद में उतनी ही मजबूती से सुनी जाए जितनी बड़े राज्यों की।

कोई भी कानून तभी पारित हो सकता है जब उसे दोनों सदनों की मंजूरी मिले। यही व्यवस्था एक दूसरे की जांच परख की तरह काम करती है, ताकि किसी भी फैसले पर पर्याप्त बहस हो और वह जल्दबाजी में पारित न हो जाए।

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