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इतिहास के पन्ने

ओलंपिक मशाल रिले की शुरुआत और उसका प्रतीकात्मक अर्थ

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A Mammoth Photographics enlarger is set up for traditional darkroom photography.
Photo: Broadcast studio camera (53997810821) by Ethan Long (CC BY-SA 2.0), via Openverse

ओलंपिक मशाल रिले वह परंपरा है जिसमें खेलों की शुरुआत से पहले एक जलती हुई मशाल कई धावकों के हाथों से गुजरते हुए मेजबान शहर तक पहुंचाई जाती है। यह मशाल यूनान में जलाई जाती है, उसी परंपरा की याद में जो प्राचीन ओलंपिक खेलों से जुड़ी मानी जाती है।

यह रिले आधुनिक युग में बीसवीं सदी में शुरू हुई परंपरा है, और इसका मकसद ओलंपिक खेलों को प्राचीन यूनानी विरासत से भावनात्मक रूप से जोड़ना था। मशाल का सफर अक्सर कई देशों और शहरों से होकर गुजरता है, जिससे यह आयोजन शुरू होने से पहले ही दुनिया भर का ध्यान खींचने लगता है।

मशाल की लौ को शांति, एकता और मानवीय भावना की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है। जब यह अंततः मुख्य स्टेडियम में पहुंचकर विशाल कड़ाही को प्रज्वलित करती है, तो यह पल खेलों के औपचारिक उद्घाटन का सबसे भावुक और यादगार क्षण बन जाता है।

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